Thursday, July 30, 2020

कोई बात ही नहीं जो कहूं !

कई दफा बातें बहुत होती है पर बात नहीं हो पाती 
शायद बात हो ही जाती तो इतनी बातें नहीं हो पाती 
उतनी बातें और इतनी सी बात, मानो दिखाती ज़िन्दगी 
भरे तमाशे, अहम की ऊहापोह, लालसाओं की बिछी चादर 
इन बहुत बातों के बीच, कहीं छिपी
थोड़ी सी संजीदगी, एक चम्मच बेफिक्री, ज़रा सी राहत और मिट जाने का एहसास 
इतनी सी बात, इतनी सी ज़िन्दगी

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