Sunday, March 8, 2020

पृथक ना कोई

साहब, कमियां गिनाते तो थकते नहीं हो
और कहते, बेमानी रिश्ते रखते नहीं हो !
जो मर्म बातें है वो सामने रखते नहीं हो
और कहते, हमें कोई समझते  नहीं है !!
अपनी ही कहते हो, अपनी ही सुनते हो
और कहते की नेक लोग मिलते नहीं है !
कोई सांच सुनाए और सच में कोई सुन ले
फिर कहां कोई दूजा, सब खुद से लगते है !
कोई ना पृथक फिर, सब सखा से रमते है !!
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