Tuesday, July 2, 2019

क्या हाल है, भाई ?

उन्होंने कहा ' क्या हाल?'
जब तक मैं जवाब देता , उनकी नजर भी किसी और तरफ और कदम भी कहीं और
मैंने भी कह दिया ' अच्छा हूं '
थोड़ी  दूर निकले थे कि मैंने  भी पूछ दिया ' आप कैसे हो ?'
दूरी और बढ़ गई थी मैंने हल्की आवाज़ सुनी जबाब में, ' सब बढ़िया जी '

लोग शायद हाल जानना तो चाहते हो पर वक़्त कहां  आजकल यहां
या फिर वाकई हाल जानना ही ना हो किसी को किसी का
यूं ही पूछे चले जाते है
क्यूंकि रिवाज़ है एक
यूं ही मुस्कुराए  चले जाते है
कि अंदाज़  है एक
ना उत्तर की खोज है या भाव की अभिव्यक्ति
मानो अगर कोई किसी को अपने हालात बता भी दे
और कोई सुन भी ले  बगैर नकली सुझावों और बिना निठुराई दिखाए
तो हालात बदलते तो नहीं,  अच्छे  या बुरे! 
शायद मतलब ये है इन रिवाजों का कि मन को बांटा जाए ,
और ऐसे मन बांटकर
इस बटे हुए मन को एक किया जाए !
जब मुस्कान बांटी जाए
तो दिल भी बांटी जाए
दुआएं बांटी जाए
एक इबादत का खयाल हो इंसानी रिश्तों के प्रति !
छोड़ो ,
अब मैंने सोचा है कि तुम ठीक हो और मैं भी बढ़िया का व्यापार ही ख़तम करूं
क्यूं शब्दों को  यूं ही ज़ाया करूं ,
क्यूं तुम्हे  नकली मुस्कान  बिखेेरने कि आदत हो,

बेहतर है कि हम मौन इबादत की आदत लगायें,

आपसी  साख बढ़ाने की मुहिम चलाएं!
तब तक हाफ़िज़ खुदा को,
जो सुना है बाहर भी है और आपके अंदर भी !

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