Tuesday, May 21, 2019

पीर को संदेश

देर रात जब नींद सैर पे निकली थी
सोचा पीर को संदेश लिखूं
कहीं भूल तो नहीं गया वो हमे
संदेश कोई  प्रश्न ना था
उसके स्नेह में सारे जवाब यूं ही धीरे धीरे मिलता है
ना ही दुख बांटने की कोशिश थी
पीर को बताऊं भी तो दुख की बातें
ना ही कोई खुशी बताने का जरिया
हर खुशी उसके होने में है , उसे मालूम भी है ये
तो बताना कैसा
और अगर कोई खुशी उसके  रेहम के बगैर मिले
ऐसा भी हुआ है क्या
बस लिखा की उन्हें जताने को
की कहीं वो भूल तो नहीं गए हमे
तादात है उनके आगे
मुमकिन है कि मैं नाकाबिल भूल गया हूं
भेज दिया था संदेश
जवाब ना था कोई
दिलो की तेज धड़कने, भय, लज्जा, सबने उस पल दस्तक दी पर चले गए
कहा कहीं आंखें तो नहीं फेर की तेरे पीर ने
तू तो है ही काफिर

याद आया  यकायक उनका  परसो का वादा
कि जो हाथ पकड़ा है तो कभी छोड़ेंगे नहीं
राहत मिली, सांस आती, तभी जवाब भी आया
की तुम्हारा प्रेम प्राप्त हुआ !
तुम्हारा पीर !

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