Tuesday, May 21, 2019

अधिकार संबंधों का

हर संबंध में अधिकार की मांग है
प्रशंसा, सलाह , सुझाव, इनमें थोड़ा आगे
औरों से छुपाई हुई बात थोड़ा और बताने में आगे
शायद ये अधिकार बर्चस्व नहीं अपितु विश्वास है
विश्वास की  मैं समाज के बनाए हुए पैमाने पे खड़ा नहीं किया जाऊंगा
विश्वास कि मेरी खुशी प्रतिस्पर्धा
 की अग्नि में जलाई नहीं जाएगी
कि मेरे दर्द से किनारा नहीं किया जाएगा
बल्कि उसे थोड़ा समझा जाएगा और उस समझ, संवेदना से उसे मिटाया भी जाएगा
कि सम्मान भी मिलेगा और अधिकार वश कमियों को भी उभारा जाएगा
इस अधिकार का रूप स्वतंत्रता और प्रेम है
पराधीनता और द्वेष नहीं
यहां उद्देश्य है कि तुममें आनंद के अंकुर फूटे
और मैं आज़ाद रहूं
 ऐसे अधिकार संबंधों की गहराई को बढ़ाता है
ये  ना झुकाता है ना जताता है
ये बस अनकहे शब्दों में होता है !

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