Wednesday, May 23, 2018

कैसा हिसाब है ये ?

दो दिन वॉलेट में वो नोट और टिके
इस खातिर
बराबर मूल्य वाले पुराने नोट लोगो को देता रहा
ना जाने कैसा स्वार्थ था उसे !

कुछ सेकंड बचेंगे ,
इस वजह
जल्दी से कतार में किसी के आगे लग गया
भले कितनी दफा सात बोल के आठ बजे पहुंचा होगा 
ना जाने कैसा पाबंद था वो !

एक दस का सिक्का निकालकर वापस रख लिया था
वजह ये की देना पांच था
वो इंपोर्टेड इत्र हज़ार का था
ना जाने कैसा हिसाब था ये !

 दोस्तों से आफिस  की शिकायत करी की हफ्ते में ६ दिन बुलाते है
और रूपा महीने में दो से ज्यादा छुट्टी ना करे
वरना पैसे कटने की हिदायत थी
ना जाने कैसा बवाल था ये !

कोर्ट में वकालत करते थे
जनाब न्याय के लिए लड़ते थे
घर के मामले में तो लिंग जांच हुई
वो तो कुछ कह भी ना सका
कैसा बेजुबान था वो !

क्या हम भी बेजुबान बने रहे !

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