मेरी त्रुटियों की चर्चा बेबाक होती रही
मेरी हर भूल पे गौर फ़रमाया गया
ये वो ठहरे , ये दुनिया ठहरी
मेरे नेकी पे सिर्फ सवाल उठे
कई मुस्कान निरुत्तर गए
खुद्दारी मगरूरी में तब्दील हुई
उन्होंने अपने हर खंडन की दलील ढूंढ़ ली
चलो ये वो ठहरे , ये दुनिया ठहरी
अब तमाशाए ज़िन्दगी की आदत है
राह चलते अफवाहों की ही शोहरत है
जो मैं डिग गया तो कैसा विश्वास
जो उनके भरोसे टिक गया तो कैसा खुद्दार
मैं तो मैं ठहरा , संग नकली मुस्कानों के अडिग ठहरा
आखिर मैं मैं ठहरा और वो वो ठहरे
रीत दुनिया की है कमियों को निहारना
प्रीत मेरे आका की है पर मुझे संवारना
भूल जो माफ करे, हर चूक जो याद दिला दे,
अपने नाम के सहारे है , मुझे अपना के, मुझे निखार दे !
वो वो ठहरा , वो खुदा ठहरा !
मेरी हर भूल पे गौर फ़रमाया गया
ये वो ठहरे , ये दुनिया ठहरी
मेरे नेकी पे सिर्फ सवाल उठे
कई मुस्कान निरुत्तर गए
खुद्दारी मगरूरी में तब्दील हुई
उन्होंने अपने हर खंडन की दलील ढूंढ़ ली
चलो ये वो ठहरे , ये दुनिया ठहरी
अब तमाशाए ज़िन्दगी की आदत है
राह चलते अफवाहों की ही शोहरत है
जो मैं डिग गया तो कैसा विश्वास
जो उनके भरोसे टिक गया तो कैसा खुद्दार
मैं तो मैं ठहरा , संग नकली मुस्कानों के अडिग ठहरा
आखिर मैं मैं ठहरा और वो वो ठहरे
रीत दुनिया की है कमियों को निहारना
प्रीत मेरे आका की है पर मुझे संवारना
भूल जो माफ करे, हर चूक जो याद दिला दे,
अपने नाम के सहारे है , मुझे अपना के, मुझे निखार दे !
वो वो ठहरा , वो खुदा ठहरा !
No comments:
Post a Comment