Saturday, August 20, 2016

आँधी ! दो पंक्तियाँ !

बड़े किस्से हैं तेरी शराफत के, तो एक गांधी मुझसे भी बसते हैं !
सुना है इक तेज़ हवा हो तुम, सीने में एक आँधी हम भी रखते हैं !!

हमारे शहर में होते हैं वो, ख़बर सिर्फ़ दोस्तों को थी,
हमें बेगाना बताने की उनकी ये अदा पुरानी हुई !! 

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