एक पूरा जीवन , नाते रिश्ते
आँसू पूराने , इंसानी फ़रिश्ते
विश्वास प्रेम करुणा श्रम
प्रारम्भ में माटी, अंत भी माटी
ए माटी क्या तू सिर्फ़ माटी ??
द्वेष अहंकार पीड़ा
इच्छाओं की मार
भ्रम तथा दीपंथी विचार
किसी को पीछे छोड़ना
या हर किसी से आगे है जाना
ये सब है माटी अगर
तो ज़िंदगी क्या तू सिर्फ़ माटी ?
किसी बच्चे की किलकारी
उस बेघर की पीड़ा
एक वृद्ध के आँखों की शांति
या अकेलापन
अपने एक साथी का विश्वास
निस्वार्थत प्रेम के दो क्षण
वो आर्त भरी पुकार विधाता को
क्या ये सब है माटी ?
ऐ ज़िन्दगी, क्या तेरा मोल सिर्फ़ माटी ?
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