शब्द
Saturday, July 2, 2016
इतना फ़र्क़
तुम्हारी और मेरी बातों में सिर्फ़ फ़र्क़ इतना है
दिमाग़ी थी बातें तुम्हारी, हमारे दिल को दलील नहीं आया !
तुम्हारी और मेरी रातों मे बस फ़र्क़ इतना है
तुम्हें नींद बहुत आयी मुझे उन बातों ने जमकर सताया !!
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