Friday, November 13, 2009

अभिलाषा

ना मैं मीरा हूँ,

ना गोपियों सी विकलता मुझमे |

ना मैं सबरी हूँ ,

ना "सुर " सी सहजता मुझमे |

ना मैं अर्जुन हूँ

ना प्रहलाद सी निश्छलता मुझमे |

ना मैं भरतहूँ,

ना बाबा तुलसी की सरलता मुझमे |


ना ही कोई विद्वता ,

ना कोई गुणवत्ता मुझमें |

पर मैं हूँ चाहता

अपने अवगुणों का ही विसर्जन तुझमे

है अभिलाषा की हो कभी

मेरे दो बूँद अश्रुओं का समर्पण तुममे |

No comments: