Monday, November 9, 2009

शायद

एक आवारगी ऐसे गुज़री है
की बातें मैं उल्फत की करता हूँ

और डरता हूँ सच्चाई से
शायद , इसलिए गफलत में रहता हूँ

माफ़ करना दोस्तों, मैं बातें
बस मेरे " मैं पन " की करता हूँ

9 comments:

Meraj Ahmad said...

स्वागत!
बहुत खूब
बधाई ! संभावनायें असीम हैं।

http://samaysrijan.blogspot.com

http://swarsrijan.blogspot.com

padmja sharma said...

'मैंपन' की बात कौन नहीं करता ? स्वागत है .

अजय कुमार said...

हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और टिप्पणी जरूर करें

शशांक शुक्ला said...

कोई बात नहीं, शुरु तो करो लिखना

Amit K Sagar said...

अच्छा प्रयास है.
जारी रहें. शुभकामनायें.
---
महिलाओं के प्रति हो रही घरेलू हिंसा के खिलाफ [उल्टा तीर] आइये, इस कुरुती का समाधान निकालें!

Sanjay Grover said...

हुज़ूर आपका भी एहतिराम करता चलूं.......
इधर से गुज़रा था] सोचा सलाम करता चलूं

http://www.samwaadghar.blogspot.com/



Web-Stat का दावा-
आपके पाठकों की टोटल डिटेल्स : एक माह तक मुफ्त : नीचे दिए
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http://www.web-stat.com/?id=3185

Sanjay Grover said...

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Chandan Kumar Jha said...

कम शब्दों में बड़ी बात कह गये आप ।

गुलमोहर का फूल

dweepanter said...

बहुत ही सुंदर रचना है। ब्लाग जगत में द्वीपांतर परिवार आपका स्वागत करता है।


pls visit........

www.dweepanter.blogspot.com