नानक
वो शाह भी है, और, फकीर भी
वो सत्य भी है, एकता की लकीर भी
खिचीं इस सरजमीन पर उसकी शख्सियत ऐसी
की पांच सदियों में कोई भुला ना पाया रूह उसकी
मानों उसकी तो ना वो जात में है, ना उंच नीच में
वो तो है,
कीरत, नाम जपन और मुफ़लिसो की सींच में !
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