Saturday, August 11, 2018

कसूूर शब्दों का !

कभी मुक्कमल शब्द ना मिले,
कभी उन्होंने जल्दी में समझना चाहा !

बातें बेहतर हीं बयां हो गई होती,
जो हम ख़ामोश रह गए होते !!

गौरव/KG

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