दिल में एक ग़ुबार सा है
तुमने शुरुआत की है तो
बड़ी लम्बी चलेगी गुफ़्तगू
पूरी ज़िंदगी लेकर आ सको तो आओ
दो जिंदगियाँ मिलाकर सुना है
जीवन का दर्पण थोड़ा चमक जाता है
कभी तुम अपना मन मुझे उधार देना
तो कभी अपना दिल मैं तुमहे
अपने अंदर को थोड़ा निखारते हुए
थोड़ा बाहर का ग़म भी चुराते हुए
साथ हंस भी लेंगे और रो भी
शायद संग धड़कने ज़्यादा संजीदगी से चलेंगे
शायद परिस्थितियाँ कम तंग करेंगे
इतना ही नहीं
अच्छे से जान पाए, अगर
एक रूह दूसरे को पहचान गए
तो
उस पार भी मिलेंगे
और विधाता से फ़रमाइस कर
एक ज़िंदगी और उधार लेंगे
फिर संग जी लेंगे
फिर संग हंस लेंगे
फिर संग रो लेंगे
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