आज मैने अंधेरा देखा
तनिक अंदर, वही अधिक बाहर देखा !
अहम की चादर पसारे ,
एक अदना सा इंसा देखा !
उदासी का लिबास सिगरेट के घिरते धुएँ मे ,
तो खुशी की नुमाइश उछलते सिक्कों मे देखी!
सीमायें लाँघती बाजारू श्रेष्टता की ललक,
तो प्रपंच की ख्वाइश उनकी मुस्कुराहट मे देखी !
उनकी आँखों मे अधिक आग
और तनिक नमी देखी !
आज मैने अंधेरा देखा,
तनिक अंदर और वही अधिक बाहर देखा !!
तनिक अंदर, वही अधिक बाहर देखा !
अहम की चादर पसारे ,
एक अदना सा इंसा देखा !
उदासी का लिबास सिगरेट के घिरते धुएँ मे ,
तो खुशी की नुमाइश उछलते सिक्कों मे देखी!
सीमायें लाँघती बाजारू श्रेष्टता की ललक,
तो प्रपंच की ख्वाइश उनकी मुस्कुराहट मे देखी !
उनकी आँखों मे अधिक आग
और तनिक नमी देखी !
आज मैने अंधेरा देखा,
तनिक अंदर और वही अधिक बाहर देखा !!
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