शब्द
Thursday, November 15, 2012
Feelings in two lines ..
यूँ ही गुमराह से चलते हुए मुलाकात हो जाती थी उनसे,
अब उनकी गली में भी दीदार उनका हो तो मुश्किल से !
आज दिल में फिर से एक फितूर सा छाया है
और एक रकीब को घर दावत पे बुलाया है |
पता नहीं किसकी क्या नीयत है यहाँ
हर एक शक्श एक शक्शियत है यहाँ _
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment