और गुजारता हूँ दिन मैं औरों की परवाह करते करते ...
....................................................................
ये झूठ जबान को छोड़े की, पूछ लिया करते थे पहले
अब तो , ये भी बगावत पे उतर आये हैं .......
......................................................................
'मै हूँ' की शराब में डूबने लगा था मैं
कल लाचारी ने आइना दिखा दिया |
परवाह करते करते मरने लगा था मैं
आज बेपरवाही ने झलक से जीना बता दिया ||
........................................................................
नए रिश्ते बनाने की होड़ में ऐसा दौड़ा
की कई बुने बुनाए रिश्ते उधड गए
लो जब जेहन में ये ख्याल आ ही गया
तो क्यों ना
उस उधडन पे दो टूक बातों की सीलन चढ़ाउ ..
........................................................................
नए रिश्ते बनाने की होड़ में ऐसा दौड़ा
की कई बुने बुनाए रिश्ते उधड गए
लो जब जेहन में ये ख्याल आ ही गया
तो क्यों ना
उस उधडन पे दो टूक बातों की सीलन चढ़ाउ ..
2 comments:
nice
Dhanyawaad Ashish ji
Post a Comment