Wednesday, August 4, 2010

तुमने पूछा क्या है..........?

दरिया या समंदर
या कहूं सिमटी सी गली
तू प्रश्नों की है लड़ी
या हर पल एक जबाब
उफनती लहरे कहूं तुझे
या किसी गर्त की ख़ामोशी
खुशियों की मेज़ समझूं
या गम की चादर
दीवानों की हसरत कहूं
या मयखाने का साकी
लबालब भरी सी
या अभी भरना है बाकी
इस ढलान पे संभालू खुद को
या अभी चढ़ना है बाकी

आजादी की चाह
तो कभी बाँधने की साजिश
जद्दोजहद , जीत , उत्साह
कभी रफ़्तार तो कभी आराम
कुछ तो बात है यहाँ ख़ास
कहाँ यार , सब कुछ तो है यहाँ आम
संघर्ष , द्वन्द , भ्रम
चुनौती या बिना चाह के श्रम
ये मंजिल है तो कभी रास्ता
दोस्ती , प्यार रिश्ते फ़रिश्ते
बेगाना तो कभी लगा एक गहरा वास्ता
नित्य है नया या है कोई आदत
या तू है बस खुदा की इबादत

दिलों की बस्ती कहूं तुझे
या भटकन इस मन की

हकीक़त है या है कोई सपना
यादों की चौखट या आशाएं तू कल की

एक सिद्दत का कतरा चाहिए बस
और जिंदगी ख़ोज है ज़िंदगी की
जिंदगी ख़ोज है ज़िंदगी की ||

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