मैंने यहाँ शिकवे बटोरे
और मैं ही देखता भी रहा
तुमने वहाँ तारीफे की
मैं उसे भी सुनता रहा
प्रेम को व्यवसाय बनाया तुमने
तोह भी मैं उसे बुनता रहा
शब्दों को डराया ,
भावों को निचोरा तुमने
तो भी मैं कहता ही रहा
बंधन सभी रूठ गए ,
और आदर्श मूल्य टूट पड़े
मैं उसे भी चुनता रहा
प्रेम को व्यवसाय बनाया तुमने
पर मैं उसे ही धुनता रहा
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