Friday, September 19, 2008

कुछ हाइकु {5.7.5}

जहाँ मे आता

क्यूँ ना एक अर्जुन

फिर से कोई


निकलती क्यूँ 

ना फिर कोई गंगा

शिव जटा से


होती क्यूँ नही

उन्मत कोई मीरा

फिर से यहाँ

 

आता क्यूँ नही

फिर कन्हैया कोई

आंगन मेरे



कुमार गौरव

3 comments:

संगीता मनराल said...

अच्छा प्रयास है, और लिखो संम्भावनायें काफी है||

Anonymous said...

achche thoughts hain...and it has been well framed.

faiz rizvi said...

kumar gaurav....
kuch alag sa is naam main..