जी जी के थक लिया हर रोज़ ,
इक शाम उसपे मरना सिखा दे
कभी हंस के , कभी रो के थक लिया मैं,
ऐ मौला , मुझे हंसते हुए रोना सिखा दे !
सलीकों की क़द्र करते इतने दिन बीते ,
इक रोज़ पागल सरीखा दीवाना बना दे !
डर लिया बहुत आग से अब मैं ,
इक रात के लिए मुझे परवाना बना दे!
गौरव
इक शाम उसपे मरना सिखा दे
कभी हंस के , कभी रो के थक लिया मैं,
ऐ मौला , मुझे हंसते हुए रोना सिखा दे !
सलीकों की क़द्र करते इतने दिन बीते ,
इक रोज़ पागल सरीखा दीवाना बना दे !
डर लिया बहुत आग से अब मैं ,
इक रात के लिए मुझे परवाना बना दे!
गौरव
3 comments:
बहुत खूब ||
Superb darling...keep it up..
सुभान अल्लाह ..
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